प्रेरणा,हिम्मत और उम्मीद की मिसाल है ‘शीरोज हैंगआउट|’

प्रेरणा,हिम्मत और उम्मीद की मिसाल है ‘शीरोज हैंगआउट|’


एक ऐसी जगह जो हमें मानवता का एहसास दिलाती है | देश भर में तेज़ाब फकेनें के अपराध के खिलाफ़ समुचित कानून ना होने पर, जब एसिड अटैक सरवाइवर लक्ष्मी ने आवाज़ उठाई तब शुरूआत हुई “स्टॉप एसिड अटैक” अभियान की | यह अभियान मार्च 2013 में शुरू हुआ उसके बाद मई 2013 में  ‘छाँव फाउंडेशन’ अस्तित्व में आया,जो एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए काम कर रहा था | यूपी का आगरा पहली ऐसी जगह है जहां शीरोज हैंगआउट की शुरुआत हुई| शीरोज हैंगआउट के संस्थापक ‘आलोक दीक्षित’ ने कहा, “यह पहल स्टॉप एसिड अटैक अभियान का हिस्सा है|” जहां एक ओर  महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाता है वहां एसिड अटैक सर्वाइवर्स को उस सदमे से उभर कर नए सिरे से जिंदगी शुरु करने और अपने पैरों पर खड़े होने की हिम्मत देता है यह शीरोज हैंगआउट |

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