एक लड़की की कहानी

“जिंदगी का सफर है यह कैसा सफर,
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं”  
इस खूबसूरत गाने की याद के साथ मैं आपको बताना चाहती हूं एक आम सी लड़की की जिंदगी के सफर के बारे में |
एक छोटी सी और एक मोटी सी लड़की की कहानी |वैसे कहने को तो रक्षा उसका नाम है, लेकिन वह मोटी,भैंस और हाथी के नाम से बदनाम है |
“मोटी कहकर हंस रहा तो हंसता रहे जहाँ,वह लोगों की बात का बुरा मानती नहीं”



कक्षा में शांत सी रहने वाली वह लड़की बाहर गदर है मचाती,
अपने दोस्तों के साथ फिल्मों के गाने है वह गाती |
सीधी सादी सी सोच रखने वाली यह  लड़की,जिसने अपनी आंखों में न जाने कितने सपने सँजो रखे थे |



“आसमान की बुलंदियों को छूने की चाहत है उसकी,
पर सीढ़ियां उन्हें मुबारक जिन्हें सिर्फ छत तक जाना है,
अपने आसमान का रास्ता तो उसे खुद ही बनाना है |”

“अंखियों के झरोखों से उसने देखा जो सामने,
बड़ी दूर नजर आए.. बड़ी दूर नजर आए”
कुछ ऐसी ही हालत थी उसके सपनों की |
वह चली तो थी अपनी मंज़िल को पाने के लिए | कभी डॉक्टर बनने की चाहत तो कभी बैंकर बनने की ख़्वाहिश लिए | क्या बताऊं उस लड़की ने क्या-क्या नहीं है किया.. लेकिन राहों के पत्थर ने उसे आगे बढ़ने ना दिया |
कभी marks का पंगा हुआ, तो कभी अपनी ही नज़रों ने धोखा दे दिया |
नजर उसकी धुँधली थी पर उसकी मंज़िल उसे साफ नजर आती थी | लक्ष्य की बात हो अगर कहीं तो वह मैदान में फिर खड़ी हो जाती थी |



कहने को तो गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है,पर उसने उससे एक अलग ही दोस्ती कर रखी थी, और दोस्ती भी कैसी बिल्कुल जय और वीरू के जैसी |
पर अम्मी जान कहती थी -
“जिन्हें गुस्सा आता है,
वह लोग सच्चे होते हैं,
मैंने झूठों को अक्सर,
मुस्कुराते हुए देखा है”
गुस्सा-वुस्सा,रोना-धोना,हंसी  मज़ाक,डॉक्टर-वाक्टर यह सब तो उसके सपनों को पाने की राह के छोटे से हिस्से हैं और सुनाने को तो वैसे और भी बहुत किस्से हैं |
लेकिन ना ही उसके सपनों की लिस्ट खत्म होती है ना ही उसके failures की कहानी
बस इतनी सी ही है उसकी ज़िंदगानी - मेरी ज़ुबानी |

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