अंदाज़-ए-नखलऊ

                 अंदाज़-ए-नखलऊ






हमारा अपना लखनऊ या यूं कहें कि
Luck-now.
लक्ष्मणपुरी से लक्नौउ और फिर लक्नौ से लखनऊ में बदलता यह शहर |
हजरतगंज दिल में लिए और चौक से अपनी पहचान बनाता यह शहर |
सच ही कहते हैं लोग “जो लखनऊ में आता है वह यहीं का होकर रह जाता है” यह शहर बहुत ही
खूबसूरती से किसी को भी अपना बना लेता है |
“कुछ अलग सी बात है इस शहर में,
बहुत ही अपने से ज़ज़्बात हैं इस शहर में|”

सुबह का लखनऊ-



हर जगह की सुबह एक ही जैसी होती है, फिर क्या अलग है लखनऊ की सुबह में?
शर्मा की चाय समोसे से शुरू होती है यह सुबह,रेवड़ी की मिठास में कहीं घुल सी जाती है|
सूरज उगते ही शर्मा की दुकान के पास लगी भीड़ ही गवाह है लखनऊ की गुड वाली मोर्निंग्स की |


तहजीब-ए-लखनऊ-


“अदब, नज़ात और तहज़ीब होती है हर पहर में, मुस्कुराइए आप हैं लखनऊ शहर में |”
लखनऊ की तहज़ीब और ‘पहले आप’ वाला कल्चर पूरे देश में एक अलग सी पहचान दिलाता है|
लखनऊ की बात हो और शायरों का ज़िक्र ना हो यह तो हो ही नहीं सकता | यहां रहने वाले हर शख्स में एक शायर बसता है | शायरों ने लखनऊ की खूबसूरती और अदब को अपनी शायरी में क्या खूब बर्ता है | कोई लखनऊ की शामों  को याद करता है तो कोई इसके दरबारों की रंगीनी को तो कोई गंगा जमुनी तहज़ीब को |
हर रूप में बेहतरीन है यह शहर लखनऊ |


लखनऊ का खाना-


“आओ सुनाऊं प्यार की एक कहानी,
प्रकाश की कुल्फी और इदरीस की बिरयानी”
जी हाँ,लखनऊ के खाने में बसता है यहां का प्यार |
रेवड़ी,लखनवी चाट और बाजपेई की कचौड़ियों की वकालत करते तो आपको हर कोई मिल जाएगा |
अमा यार ! लखनऊ आए और टुंडे के कबाब ना खाए तो क्या खाया |
प्रकाश की कुल्फी में तो ऐसा जादू है मानों जैसे मुंह में घुल सी जाती है |


लखनऊ या यहां के लोगों की भाषा में बोले तो नखलऊ, यहां रहने वाले हर शख्स के दिल में बसता है|
ठीक ही कहते हैं -
“लखनऊ हम पर फिदा और
हम फिदा-ए-लखनऊ”

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